नैनीताल :::- नैनीताल की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण सूखाताल झील की बदहाल स्थिति पर अब उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UKSLSA) ने गंभीर चिंता जताई है। झील और उसके आसपास के क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद प्राधिकरण ने नगर पालिका और संबंधित विभागों को पत्र भेजकर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो झील के संरक्षण के लिए वह स्वयं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ मिलकर पहल करेगा।
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने बताया कि सूखाताल झील वैश्विक विरासत की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। निरीक्षण के दौरान झील और उसके आसपास बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य सामग्री के रैपर और अन्य कचरा बिखरा मिला। इसके अलावा झील के चारों ओर बना वॉकिंग ट्रैक भी कई जगह क्षतिग्रस्त और बदहाल स्थिति में पाया गया।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि पार्किंग की व्यवस्था होने के बावजूद कई वाहन झील क्षेत्र और वॉकिंग ट्रैक के आसपास अवैध रूप से खड़े किए जा रहे हैं। इससे न केवल पर्यटकों और स्थानीय लोगों को परेशानी होती है, बल्कि झील के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वहीं, झील क्षेत्र में लगी अधिकांश स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब हैं, जिसके कारण शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है।
प्राधिकरण को सार्वजनिक बेंचों और आसपास के क्षेत्रों में असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें भी मिली हैं। साथ ही पूरे क्षेत्र में नियमित सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था का अभाव देखने को मिला। इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए UKSLSA ने नगर पालिका और संबंधित विभागों को झील क्षेत्र की व्यापक सफाई, स्थायी कूड़ा निस्तारण व्यवस्था, वैज्ञानिक तरीके से झील के पुनर्जीवन, अवैध पार्किंग हटाने, खराब लाइटों की मरम्मत, सार्वजनिक शौचालयों की बेहतर व्यवस्था और नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदीप मणि त्रिपाठी ने कहा कि सूखाताल झील में अपार संभावनाएं हैं। यदि इसका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और विकास किया जाए तो यह भविष्य में नैनी झील की तरह एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकती है। इससे पर्यटकों को नया आकर्षण मिलेगा और स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि नगर पालिका झील के संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से नहीं निभाती है तो उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संयुक्त रूप से इसके संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे। इसके अलावा नैनी झील के आसपास हो रहे संभावित अवैध निर्माणों पर भी संज्ञान लिया जाएगा।

