नैनीताल:::- सरोवर नगरी नैनीताल पहुंचे उत्तराखंड की जगदाचार्य पीठ के पीठाधीश्वर मेहंत श्री स्वामी आराध्या सरस्वती जी महाराज ने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक महत्ता को लेकर कहा कि नैनीताल एक पवित्र स्थल है, जहां की सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण की तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड साधु-संतों की भूमि रही है और यहां आने वाले लोगों को अलग आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है।
स्वामी आराध्या सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहां आने वाले सभी लोगों को इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक गरिमा को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उत्तराखंड पर्यटन स्थल के साथ-साथ पिकनिक स्पॉट के रूप में भी देखा जाने लगा है। बड़ी संख्या में लोग धार्मिक भावना से आते हैं, लेकिन कुछ लोग केवल घूमने-फिरने के उद्देश्य से पहुंचते हैं। ऐसे में लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है।
उन्होंने असामाजिक तत्वों को लेकर कहा कि उत्तराखंड की शांति और संस्कृति को बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों पर नजर रखनी चाहिए और उचित जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाना चाहिए, जिससे प्रदेश की शांतिपूर्ण छवि प्रभावित न हो।
निहंग सिखों को लेकर दिए बयान में उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के व्यवहार की वजह से पूरे सिख समाज की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि सिख समाज का बड़ा हिस्सा शांतिप्रिय, सेवाभावी और भाईचारे का संदेश देने वाला है।
स्वामी आराध्या सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड में पहुंचकर व्यक्ति को एक अलग ही अनुभूति होती है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण मन को शांति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मुक्ति और आध्यात्मिक अनुभव को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता।
प्रदेश सरकार के कार्यों पर उन्होंने कहा कि धार्मिक गतिविधियों और पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ को लेकर भी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और यह आयोजन भव्य रूप से किया जाएगा।

