नैनीताल:::- उच्च न्यायलय के निर्देश के बाद स्वास्थ्य सचिव उत्तराखंड विनय शंकर पांडे ने बुधवार को बीडी पांडे जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, इमरजेंसी, फार्मेसी, महिला वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, पैथोलॉजी समेत अस्पताल के विभिन्न विभागों और वार्डों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। फार्मेसी में कई आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए समय से दवाओं की मांग भेजने और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि अस्पताल की सभी ओपीडी और अन्य विभागों का निरीक्षण कर वीडियोग्राफी भी कराई गई है। इसकी रिपोर्ट का दो से तीन दिन के भीतर विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने कहा बीडी पांडे अस्पताल यहां की लाइफलाइन है। अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से भी वार्ता की गई है। स्वास्थ्य सचिव ने जिलाधिकारी से वार्ता कर अस्पताल में छोटे-छोटे उपकरणों समेत जो भी कमियां हैं, उन्हें शीघ्र पूरा किया जाए। इसके लिए यूजर चार्ज से प्राप्त होने वाले फंड का उपयोग किया जा सकता है। बड़े कार्यों के लिए जल्द ही विशेष टीम भेजकर अस्पताल की जरूरतों के अनुरूप डीपीआर तैयार कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अस्पताल की व्यवस्थाओं और सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके।
डॉक्टरों की कमी को लेकर बताया कि राज्य में डॉक्टरों का कुल कैडर 2909 है, जबकि वर्तमान में करीब 2500 डॉक्टर कार्यरत हैं। करीब 400 डॉक्टरों की कमी है, जिसे विभिन्न स्रोतों से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले डॉक्टरों का शॉर्टफॉल करीब 650 था। हाल ही में मेडिकल बोर्ड से 252 डॉक्टर मिले हैं, जिनमें मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं। इनमें करीब 200 डॉक्टर ज्वाइन भी कर चुके हैं। शेष 400 से 450 डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए मेडिकल बोर्ड लगातार प्रक्रिया कर रहा है।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी को दूर करने के लिए 422 डॉक्टरों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले डॉक्टरों को जरूरत के अनुसार पांच वर्ष तक अतिरिक्त सेवा का अवसर भी दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक अस्पताल में नियमित रूप से सीएमएस की तैनाती रहती है, जो मौके का अधिकारी होता है। उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी अस्पताल की व्यवस्थाओं का स्वयं निरीक्षण करना और कमियों को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाना है। उन्होंने कहा कि सीएमएस के ऊपर डायरेक्टर हेल्थ और उसके बाद शासन स्तर होता है। छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी भी होती है और जिलाधिकारी द्वारा समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण किया जाता है। उनका प्रयास है कि मौके पर तैनात अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएं और व्यवस्थाओं में कमी मिलने पर उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
इस दौरान डॉ. सौरभ, अस्पताल की पीएमएस डॉ. द्रौपदी गर्ब्याल, फार्मासिस्ट आईके जोशी समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

