नैनीताल:::- कुमाऊं विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की ओर से हर्मिटेज के देवदार हॉल में सार्वजनिक पुस्तकालय पेशेवरों के लिए आयोजित पांच दिवसीय ‘कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम’ के दूसरे दिन विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की। कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन के तहत किया जा रहा है।
कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क सहित बौद्धिक संपदा अधिकारों के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए पुस्तकालय एवं सूचना सेवाओं में IPR के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ ही पारंपरिक ज्ञान, जैव विविधता और हिमालयी औषधीय पौधों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रो. तिवारी ने शोधार्थियों को अपने शोध एवं मौलिक रचनाओं के पेटेंट, कॉपीराइट और जीआई टैग के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने उत्तराखंड के तेजपत्ता, मंडुवा, झंगोरा और ऐपण कला जैसे स्थानीय उत्पादों को जीआई टैग के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने में बौद्धिक संपदा अधिकारों की भूमिका भी बताई। उन्होंने कहा कि किताब, शोधपत्र, थीसिस, फोटो, पेंटिंग, वीडियो, सॉफ्टवेयर और वेबसाइट कंटेंट जैसी मौलिक रचनाओं को कॉपीराइट के माध्यम से कानूनी संरक्षण दिया जा सकता है।
प्रो. दीपक पालीवाल ने ‘सार्वजनिक पुस्तकालयों में ओपन एजुकेशन की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज के माध्यम से विद्यार्थियों और आम नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने में सार्वजनिक पुस्तकालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
तकनीकी सत्र में विजय प्रताप सिंह ने पुस्तकालय स्वचालन सॉफ्टवेयर कूहा की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने कैटलॉगिंग, सर्कुलेशन और सदस्यता प्रबंधन सहित विभिन्न सुविधाओं का प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. युगल जोशी, उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. चारु चंद तिवारी, दीप चंद तिवारी सहित विभाग के शोधार्थी मौजूद रहे। मंच संचालन मनोज कुमार ने किया।
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नैनीताल : पुस्तकालयों को डिजिटल बनाने पर जोर, आईपीआर और ओपन एजुकेशन की दी जानकारी

