नैनीताल :::- जिस अमावस्या के दिन यदि सोमवार हो तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है।  बमुश्किल वर्ष में एक या दो बार सोमवती अमावस आती है, परंतु अधिक वर्ष में सोमवती अमावस आना बहुत दुर्लभ है। पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कई वर्षों में ऐसा संयोग बनता है, क्योंकि प्रत्येक तीसरे वर्ष तो अधिक मास आता है जरूरी नहीं है कि प्रत्येक तीसरे वर्ष की अमावस सोमवती अमावस ही हो। इसलिए इस अमावस की महत्ता हजारों गुना बढ़ जाती है। इस बार दिनांक 15 जून   सोमवार को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी।  अमावस्या तिथि 14 जून की दोपहर 12:20 से प्रारंभ होगी और 15 जून को प्रातः 8:24 तक रहेगी इसलिए उदया तिथि के आधार पर दिनांक 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन मृग शिरा नामक नक्षत्र शाम 7:08 तक रहेगा। शूल योग प्रातः 8:55 तक रहेगा। इस दिन यदि स्नान दान और तर्पण के शुभ मुहूर्त की बात करें तो अमृत और सर्वोत्तम मुहूर्त प्रातः 5:23 से लेकर 7:08 तक रहेगा। इस शुभ समय में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक पितरों का तर्पण और जरूरतमंद लोगों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी।  दान बिना किसी स्वार्थ, दिखावे या फल की इच्छा के, उचित समय पर योग्य व्यक्ति को केवल कर्तव्य समझकर दिया जाए, वही सात्त्विक दान कहलाता है।
ज्येष्ठ अधिक अमावस्या ऐसा ही पवित्र समय है, जब श्रद्धा और निःस्वार्थ भाव से किया गया दान जीवन में आध्यात्मिक शांति और ईश्वरीय कृपा प्रदान करता है। शास्त्रों के अनुसार सेवा और दान से न केवल व्यक्ति के पापों का क्षय होता है, बल्कि उसके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

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