नैनीताल::::- न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, नियमितीकरण और पेंशन समेत विभिन्न मांगों को लेकर उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) ने मंगलवार को धरना-प्रदर्शन कर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आशाओं की मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। यूनियन ने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ज्ञापन में कहा गया कि ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के आह्वान पर सितंबर माह के प्रत्येक मंगलवार को आशाएं सीएससी, पीएचसी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और राजकीय चिकित्सालयों में धरना-प्रदर्शन करेंगी। कहा कि आशाओं से स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अभियानों और मातृ-शिशु सुरक्षा संबंधी कार्यों में लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है।
यूनियन ने 31 अगस्त 2021 को खटीमा में हुई वार्ता को लेकर कहा कि आशाओं के लिए 11,500 रुपये मासिक मानदेय निर्धारित करने का वादा किया गया था, लेकिन पांच वर्ष बीतने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया।
ज्ञापन में 11,500 रुपये मासिक मानदेय संबंधी प्रस्ताव लागू करने, न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा देने, सेवानिवृत्ति पर पेंशन अथवा 10 लाख रुपये एकमुश्त देने, विभिन्न मदों का भुगतान हर माह करने तथा प्रशिक्षण और पल्स पोलियो अभियान में प्रतिदिन 500 रुपये भुगतान की मांग की गई। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में आशाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार, विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पद भरने, अस्पतालों में आशा घर बनाने, एनएचएम का बजट बढ़ाने और आशाओं की छंटनी रोकने की मांग भी उठाई गई।
यूनियन ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले मांगों का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल, चंद्रा सती, चंपा बिष्ट, सरिता बिष्ट, गंगा, प्रेमा अधिकारी, बबिता, शांति शर्मा, हेमा रावत, सीमा बिष्ट, लीला बिष्ट, पूनम, हेमा, विमला साह, प्रभा बिष्ट नीरू, पुजारी आदि मौजूद रही।

