नैनीताल:::- नंदा देवी महोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस बार पिथौरागढ़ की शोर घाटी का प्रसिद्ध लखिया भूत सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा।  श्री राम सेवक सभा की ओर से आयोजित श्री नंदा देवी महोत्सव 2026 का आयोजन 16 से 23 सितंबर तक किया जाएगा। जिसको लेकर सभा द्वारा सोमवार को श्री राम सेवक सभा मे प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियां, नगर भ्रमण और दीपदान समेत विभिन्न आयोजन होंगे।
सभा के सदस्य प्रो. ललित तिवारी ने बताया नंदा देवी महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड और हिमालय की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और लोगों के रहन-सहन से जुड़ा महत्वपूर्ण लोक पर्व है, वर्षभर लोग इस महोत्सव का इंतजार करते हैं। उन्होंने बताया कि कदली वृक्ष लाए जाने के बाद उससे मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है। कदली वृक्ष से प्रतिमा निर्माण की परंपरा यह संदेश भी देती है कि यदि हिमालय सुरक्षित रहेगा तो मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा  महोत्सव भाद्रपद की अष्टमी के अवसर पर ब्रह्ममुहूर्त के बाद मां नंदा-सुनंदा की स्थापना की जाएगी। जिसके बाद हवन किया जाएगा, साथ ही श्रद्धालुओं के लिए महाभंडारे का आयोजन होगा।  नंदा देवी महोत्सव में स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी, विभिन्न सांस्कृतिक दलों के साथ पारंपरिक छोलीया नृत्य भी प्रस्तुत किया जाएगा।

सभा के सदस्य मुकेश जोशी मंटू ने बताया कि महोत्सव का शुभारंभ अतिथियों द्वारा किया जाएगा, बताया कि महोत्सव का शुभारंभ 16 सितंबर को होगा। 17 सितंबर को कदली वृक्ष का नगर भ्रमण कराया जाएगा। सुबह सुखाताल में कदली वृक्ष का भव्य स्वागत होगा। जिसके बाद तल्लीताल वैष्णव देवी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद जुलूस के साथ कदली वृक्षों का नगर भ्रमण कराया जाएगा और शाम को नैना देवी मंदिर में कदली वृक्षों की पूजा होगी।
18 सितंबर को दोपहर एक बजे से श्री राम सेवक सभा प्रांगण में स्कूली बच्चों की वेशभूषा प्रतियोगिता और लोकगीत प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। 19 सितंबर को नंदा अष्टमी के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके बाद श्रद्धालु पूजा-अर्चना करेंगे। 19 से 22 सितंबर तक शाम 6:30 बजे से पंचआरती, प्रसाद वितरण, रात्रि में देवी पूजन और देवी भोग का आयोजन होगा।
20 सितंबर को नवमी के दिन सुबह 10 बजे दुर्गा सप्तमी पाठ एवं हवन और दोपहर एक बजे कन्या पूजन होगा। 21 सितंबर को दोपहर एक बजे से डीएसए मैदान में महाभंडारा आयोजित किया जाएगा। 22 सितंबर को दोपहर दो बजे से सुंदरकांड व नंदा चालीसा तथा शाम सात बजे नैनी झील में दीपदान होगा। 23 सितंबर को देवी पूजन के बाद दोपहर 12 बजे से नगर में डोला भ्रमण कराया जाएगा। इसके बाद मंदिर के समीप डोले का विसर्जन किया जाएगा।
महोत्सव के दौरान 19 से 22 सितंबर तक शाम 6:30 बजे से श्री राम सेवक सभा प्रांगण और तल्लीताल डांट में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस वर्ष स्कूली बच्चों की झांकियों और छोलिया दलों के साथ स्थानीय महिलाओं का झोड़ा भी आकर्षण का केंद्र रहेगा वही अखाड़े, आकर्षक झांकियां और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां भी होंगी।
महोत्सव में स्थानीय कलाकारों को विशेष महत्व दिया जाएगा, झोड़ा नृत्य समेत अन्य लोक विधाओं की शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। 
इस दौरान अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव जगदीश बवाड़ी, प्रो. ललित तिवारी, कमलेश ढौंडियाल, भीम सिंह कार्की, मोहित लाल साह, अशोक साह, देवेंद्र लाल साह, भुवन बिष्ट, राजेंद्र लाल साह, विमल चौधरी, हरीश राणा, दीपक साह, कैलाश बोरा, आनंद बिष्ट, संरक्षक घनश्याम लाल साह आदि मौजूद रहे।

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