नैनीताल:::- हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल महाशिवरात्रि इस साल 15 फरवरी रविवार को मनाई जाएगी।  ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार का शिवरात्रि का पर्व बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु के साथ चतुर्ग्रही योग बन रहा है साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी प्रातः 6:55 बजे से शाम 7:48 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा-अर्चना और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पंडित प्रकाश जोशी बताते हैं कि शास्त्रों में शिवरात्रि को तीन प्रमुख पवित्र रात्रियों महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी और दीपावली में सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है।  मान्यता है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ की आराधना करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है. चतुर्दशी तिथि शाम 5:05 बजे से प्रारंभ होगी, इसलिए रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक और शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व रहेगा. भक्त दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक कर 108 बेलपत्र अर्पित करते हैं.
पंडित प्रकाश जोशी ने बताया महाशिवरात्रि से जुड़ी एक पौराणिक कथा में चित्रभानु नामक शिकारी का उल्लेख मिलता है कहा जाता है कि अनजाने में उपवास, रात्रि जागरण और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से उसका हृदय परिवर्तित हो गया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।  इस कथा के माध्यम से शिवभक्ति में करुणा और अहिंसा का संदेश दिया गया है।   बताया कि देवभूमि उत्तराखंड, खासकर कुमाऊं क्षेत्र में यह पर्व विशेष परंपराओं के साथ मनाया जाता है। लोग जंगल से ‘तैड’ या ‘तरूड’ नामक कंद निकालकर उसे पकाकर भोलेनाथ को अर्पित करते हैं और प्रसाद के रूप में बांटते हैं। घरों में मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाकर 108 बेलपत्रों से पूजा की जाती है। पिथौरागढ़, गंगोलीहाट, जौलजीबी, धारचूला, मुक्तेश्वर और बेरीनाग सहित कई शिवालयों में मेले और शिव महोत्सव आयोजित होते हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर श्रद्धा से किया गया उपवास और पूजन ग्रहदोषों को भी शांत कर सकता है।

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