नैनीताल:::- कुमाऊं विश्वविद्यालय डीएसबी परिसर में समाजशास्त्र विभाग एवं विजिटिंग प्रोफेसर निदेशालय के संयुक्त तत्वावधान में पोएट्री: ए टूल फॉर सोशल अवेकनिंग विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आगाज़ पोएट्री मूवमेंट के संस्थापक अमिताभ सिंह बघेल रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति जोशी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि समाजशास्त्र के अध्ययन के साथ कविता का पठन भी आवश्यक है, क्योंकि कई बार दो पंक्तियां वह बात कह जाती हैं, जिसे विस्तृत शोध भी पूरी तरह अभिव्यक्त नहीं कर पाता। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रियंका नीरज रुवाली ने किया।
मुख्य वक्ता अमिताभ सिंह बघेल ने अपने व्याख्यान में उर्दू और हिंदुस्तानी शायरी की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कविता सदैव सामाजिक जागरूकता का प्रभावी माध्यम रही है। उन्होंने कबीर से लेकर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, साहिर लुधियानवी, कैफ़ी आज़मी, हबीब जालिब, अदम गोंडवी और मख़दूम मोहिउद्दीन की रचनाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि कविता सामाजिक विसंगतियों, जातीय भेदभाव, लैंगिक असमानता और युद्ध जैसे मुद्दों पर सशक्त हस्तक्षेप करती है। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘ज़िंदगी से डरते हो’ का भी उल्लेख किया, जो नून मीम राशिद की नज़्मों का देवनागरी में प्रथम संग्रह है।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त हिंदी विभाग की प्रो. नीरजा टंडन ने साहित्य को ‘मन का भोजन’ बताते हुए कहा कि साहित्य केवल यथार्थ नहीं दिखाता, बल्कि यह भी बताता है कि समाज को कैसा होना चाहिए। प्रभारी परिसर निदेशक प्रो. चंद्रकला रावत ने कहा कि कबीर से लेकर कुमाऊं के गुमानी पंत तक सभी रचनाकारों ने समाज में मानवता जगाने का कार्य किया है।
विजिटिंग प्रोफेसर निदेशालय के निदेशक प्रो. ललित तिवारी ने साहित्य को मानसिक उज्ज्वलता का स्रोत बताते हुए कहा कि मस्तिष्क का सुकून ही सबसे बड़ा आनंद है।
इस दौरान कार्यक्रम में प्रो. हरीश बिष्ट, प्रो. नीलू लोधियाल, प्रो. सुषमा टम्टा, प्रो. आशीष तिवारी, प्रो. शशि पांडे, प्रो. रितेश शाह, प्रो. सावित्री कैड़ा जंतवाल, प्रो. हरिप्रिया पाठक, प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. संजय टम्टा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. भूमिका प्रसाद, डॉ. रुचि मित्तल, प्रो. देवेंद्र सिंह बिष्ट, प्रो. अर्चना श्रीवास्तव, डॉ. सरोज पालीवाल, डॉ. अर्शी परवीन, डॉ. हरीश चंद्र मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद रहें।

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