नैनीताल:::- कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर की एक छात्रा के असाइनमेंट और आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े अंकों का मामला अब जांच के घेरे में आ गया है। प्रकरण को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मानवीय आधार पर उसकी अंकतालिका में आवश्यक संशोधन करने और पूरे मामले में हुई प्रक्रियागत चूक की जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की बात कही है।
कुलपति प्रो. (कर्नल) दीवान एस. रावत ने कहा कि जिस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह उनकी नियुक्ति से पहले का है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस मामले को उनके निजी जीवन और चरित्र से जोड़कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। छात्रा के असाइनमेंट और आंतरिक मूल्यांकन में दर्ज अंकों से संबंधित प्रक्रियागत पहलुओं की जांच की जाएगी। समिति पूरे प्रकरण के तथ्यों और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण कर यह निर्धारित करेगी कि स्तर पर चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। विश्वविद्यालय के उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, भू-विज्ञान विभाग में छात्रा के असाइनमेंट जमा करने की अंतिम तिथि 25 फरवरी 2023 निर्धारित थी। उसी दिन छात्रा ने संबंधित शिक्षक को व्हाट्सऐप संदेश भेजकर बताया कि वह रामनगर में है और अगले दिन उसका जन्मदिन है। छात्रा ने 28 फरवरी को असाइनमेंट जमा करने की बात कही थी, लेकिन उक्त तारीख को असाइनमेंट जमा नहीं करवाया गया, जिसके बाद 24 अप्रैल 2023 को छात्रा ने शिक्षक से दोबारा पूछा कि क्या वह असाइनमेंट जमा कर सकती है. विश्वविद्यालय के अनुसार, इससे यह सामने आता है कि निर्धारित तिथि के करीब दो माह बाद तक असाइनमेंट जमा किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी. हालांकि, असाइनमेंट वास्तव में किस तारीख को जमा हुआ, इसका स्पष्ट अभिलेख विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। विश्वविद्यालय के मुताबिक, आरटीआई में भूगर्भ विज्ञान विभागाध्यक्ष की ओर से 24 अप्रैल 2023 को लॉगबुक प्रविष्टि के आधार पर अंक भेजे जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, उसी तारीख की लॉगबुक एंट्री में अंक प्रेषण का उल्लेख नहीं मिलने की बात विश्वविद्यालय ने कही है। 28 अप्रैल 2023 को विश्वविद्यालय ने सभी विभागों को पोर्टल पर अंक अपलोड करने के लिए तीन दिन का समय दिया था, लेकिन छात्रा के अंक पोर्टल पर अपडेट नहीं किए गए. इसके बाद 27 मई 2023 को एमएससी जियोलॉजी प्रथम सेमेस्टर का परिणाम घोषित हुआ। आरटीआई के अनुसार, 15 जुलाई 2023 को विभाग ने प्यून बुक प्रविष्टि के आधार पर दोबारा अंक भेजे जाने की बात कही। विश्वविद्यालय का कहना है कि निर्धारित तिथि के बाद असाइनमेंट स्वीकार करने और अंक भेजने के लिए परीक्षा नियंत्रक की अनुमति तथा निर्धारित विलंब शुल्क की प्रक्रिया जरूर होती है, लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड विभाग की ओर से उपलब्ध नहीं कराया गया।
विश्वविद्यालय के अनुसार, 5 अप्रैल 2024 को विभागाध्यक्ष द्वारा फिर अंक भेजे जाने का उल्लेख किया गया, हालांकि, संबंधित डायरी प्रविष्टि प्रश्नपत्र अनुभाग में भेजे जाने के कारण उसके छात्रा के आंतरिक अंकों से संबंधित होने पर भी सवाल उठे हैं। 21 मई 2025 को छात्रा ने परीक्षा नियंत्रक को पत्र देकर अंकतालिका में असाइनमेंट के अंक नहीं जुड़ने की शिकायत की। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह पत्र विभागाध्यक्ष ने 25 फरवरी 2026 को पहली बार विश्वविद्यालय को भेजा। प्रकरण परीक्षा समिति के समक्ष रखा गया, जहां अनुरोध स्वीकार नहीं हुआ।
13 जुलाई 2026 को छात्रा परीक्षा शाखा पहुंची और बाद में कुलपति से भी मिली, विश्वविद्यालय के मुताबिक, छात्रा से उसके दावे के समर्थन में दस्तावेज मांगे गए, लेकिन उसके पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद कुलपति ने छात्रहित और छात्रा के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उप परीक्षा नियंत्रक को विभागाध्यक्ष से विस्तृत रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए। 14 जुलाई को रिपोर्ट के लिए पत्र भेजा गया और 23 जुलाई को विभागाध्यक्ष की ओर से रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उपलब्ध तथ्यों और 13 जुलाई को विभाग से प्राप्त अंकों के आधार पर 30 जुलाई 2026 को प्रकरण को समाधान पखवाड़े में निस्तारित करते हुए छात्रा की अंकतालिका संशोधित कर दी गई, विश्वविद्यालय के अनुसार, छात्रा को बाद में संशोधित मूल अंकतालिका और उपाधि भी प्राप्त हो गई।
विश्वविद्यालय का कहना है कि अंकतालिका में संशोधन किसी प्रक्रियागत चूक को सही ठहराने के लिए नहीं, बल्कि छात्रा के भविष्य को प्रभावित होने से बचाने के लिए मानवीय और छात्रहितकारी दृष्टिकोण से किया गया साथ ही, विभाग की ओर से विद्यार्थी हित में समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने को प्रशासनिक अक्षमता मानते हुए कुलपति ने जांच समिति गठित की है।
कुलपति प्रो. रावत ने कहा कि उन्होंने 21 जुलाई 2023 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था, ऐसे में मूल घटनाक्रम फरवरी 2023 का है और उनकी नियुक्ति से पहले का है। उन्होंने कहा कि व्हाट्सऐप चैट के जरिए घटनाक्रम की तारीखों और बातचीत को समझने में मदद मिली। प्रो. रावत ने आरोप लगाया कि मामले को अब उनके निजी जीवन और चरित्र से जोड़कर उन्हें टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने डिजिटल सामग्री को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी तस्वीरों को AI के जरिए जनरेट या डिजिटल रूप से मॉडिफाई कर इस्तेमाल किया गया है। कुलपति ने बताया कि उन्हें 31 अगस्त को रिलीव किया जा रहा है, उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति से उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामले में कौन-कौन लोग शामिल रहे और किस स्तर पर प्रक्रियागत चूक हुई।
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नैनीताल : असाइनमेंट के अंकों के विवाद से AI तस्वीरों तक, कुलपति डीएस रावत ने राज्यपाल से मांगी उच्चस्तरीय जांच

