नैनीताल :::-  फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक 8 दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं और इन्हें आठ पवित्र दिनों के रूप में माना जाता है। यह धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय है, परन्तु जिसमें शुभ कार्यों को करना वर्जित माना गया है। इस अवधि में पूजा-पाठ और भक्ति का विषेश महत्व है, जबकि मांगलिक कार्यों और नये कार्यों की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है।
पंडित प्रकाश जोशी ने बताया धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दिनों में पूजा-पाठ, जप-तप और भगवान की आराधना का विशेष महत्व होता है। वहीं विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्यों की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। शास्त्रों और लोक परंपराओं में इस अवधि को आत्मचिंतन और भक्ति के लिए उपयुक्त समय माना गया है। जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल की प्राप्ति हो सके।
इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी मंगलवार से शुरू होकर 3 मार्च  तक रहेगा।  27 फरवरी दिन शुक्रवार को आंवला एकादशी या रंग भरी एकादशी व्रत मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा काल प्रातः 11:32 से रात्रि 10:33 तक रहेगा, अतः रंग ध्वजारोहण चीर बंधन प्रातः 11:32 तक करना चाहिए।यह अवधि फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलिका दहन तक मानी जाती है। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को होली का पर्व पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। होलाष्टक हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और धार्मिक रूप से संवेदनशील समय माना जाता है। इस समय में विशेष रूप से शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है ताकि किसी प्रकार के अशुभ प्रभाव या बाधा से बचा जा सके।

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