नैनीताल :::- फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे आंवला एकादशी या रंग भरी एकादशी कहा जाता है, इस वर्ष 27 फरवरी  को मनाई जाएगी। इस बार एकादशी पर भद्रा का साया रहेगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि रात्रि 10:30 बजे तक रहेगी। आर्द्रा नक्षत्र प्रातः 10:49 बजे तक रहेगा। भद्रा काल प्रातः 11:32 बजे से रात्रि 10:33 बजे तक रहेगा, इसलिए रंग ध्वजारोहण व चीर बंधन का कार्य भद्रा से पूर्व करना शुभ माना गया है।
धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। पंडित प्रकाश जोशी ने बताया पद्मपुराण के अनुसार आंवला एकादशी का व्रत करने से सैकड़ों तीर्थों के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। आंवले को भगवान को अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। व्रती प्रातः स्नान कर संकल्प लेकर विधि-विधान से पूजन और कथा श्रवण करते हैं।
व्रत कथा में राजा मांधाता और महर्षि वशिष्ठ के संवाद का उल्लेख है। कथा के अनुसार वैदिश नगर के राजा चैतरथ ने श्रद्धापूर्वक आंवला एकादशी का व्रत किया। उसी दिन एक पापी बहेलिया भी अनजाने में रात्रि जागरण में शामिल हुआ। व्रत के प्रभाव से अगले जन्म में वह वसुरथ नामक प्रतापी राजा बना। संकट की घड़ी में स्वयं भगवान विष्णु की कृपा से उसकी रक्षा हुई।
मान्यता है कि जो श्रद्धा से यह व्रत करता है, उसे समस्त पापों से मुक्ति और अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।

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