देहरादून:::- प्रगति के साथ उद्देश्य, विकास के साथ हरित, विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन विषय पर गुरुवार को संवाद का आयोजन द पायनियर देहरादून के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने वनों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया जो इन प्रभावों को कम करने में सहायक हैं और सतत विकास पर एक महत्वपूर्ण संवाद की आवश्यकता पर बल दिया।

देहरादून में दि पायनियर द्वारा आयोजित पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल के संबोधन के बाद कार्यक्रम में दि पायनियर के एमडी अजीत सिन्हा के सानिध्य में अनेक पर्यावरण विशेषज्ञों एवं समाज सेवीयों को सम्मानित किया गया। इस दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के महानिदेशक बंशीधर तिवारी को पायनियर के नैनीताल से अफजल हुसैन फौजी द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर हल्द्वानी के वरिष्ठ पत्रकार व पायनियर के ओपी अग्निहोत्री, रामनगर से चंचल गोला, उत्तरकाशी से सुरेंद्र सिंह ने भी मूर्धन्य सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए विद्वानों को सम्मानित किया।
प्रख्यात हड्डी रोग विशेषज्ञ और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. बीकेएस संजय ने कहा कि अत्यधिक जनसंख्या हमारे सभी समस्याओं की जड़ है। उन्होंने दो संतान का नियम अपनाने का सुझाव दिया। इससे जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ लिंगानुपात भी बना रहेगा। इससे आवास और रोजगार का बोझ भी कम होगा। उन्होंने सभी नागरिकों से न्यूनतमवाद अपनाने की अपील की एवं केवल उतना ही उपभोग करें जितनी आवश्यकता हो। यदि हम इस सोच को अपनाएं, तो यह सामूहिक रूप से बड़े स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में सहायक सिद्ध होगा।

इस दौरान डॉ. दुर्गेश पंत महानिदेशक यूकॉस्ट ने उत्तराखंड की पर्यावरणीय और ऐतिहासिक दृष्टि से रणनीतिक महत्ता को रेखांकित किया। बंशीधर तिवारी उपाध्यक्ष एमडीडीए ने प्राकृतिक संसाधनों को अगली पीढ़ी के लिए संरक्षित करने की जिम्मेदारी को सरकार, नागरिक समाज और प्रत्येक व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी बताया।


विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का विषय वास्तव में महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि जैसे मुद्दों पर तुरंत ध्यान देना आवश्यक है, जैसा कि वन मंत्री ने कहा। वनों की भूमिका को समझना और उन्हें बचाने के प्रयास करना हम सभी की जिम्मेदारी है। क्या आपको नहीं लगता कि ऐसे कार्यक्रमों को और अधिक बार आयोजित किया जाना चाहिए? मैं यह जानना चाहूंगा कि इस संवाद में और कौन-कौन से विचार सामने आए। क्या आपके पास इस विषय पर कोई और जानकारी या सुझाव है? मुझे लगता है कि ऐसे मुद्दों पर चर्चा करना हमारे भविष्य के लिए बहुत जरूरी है।