नैनीताल :::- जिला स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समिति की बैठक लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने वनाग्नि रोकथाम के लिए की जा रही पूर्व तैयारी की जानकारी लेते हुए इसकी रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि वनों में आग लगना केवल एक घटना नहीं, बल्कि प्रकृति की पीड़ा है, क्योंकि वनाग्नि से एक ओर जहां पर्यावरण प्रदूषण होता है, वही जैव विविधता भी प्रभावित होती है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि वनों में आग लगाने जैसी असंवेदनशील और अवैध गतिविधियों को अंजाम देने वाले व्यक्तियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर दण्डित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को बचाने का संकल्प है।
उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि वनाग्नि काल शुरू होने से पहले ही वनाग्नि नियंत्रण हेतु फायर लाइन बनाई जाएं और कंट्रोल बर्निंग के माध्यम से सूखी झाड़ियों एवं आग लगने वाली सामग्री को सुरक्षित रूप से हटाया जाए जिससे आग फैलने की संभावना कम हो। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि जंगलों में गिरे पीरूल को हटाने के लिए एनआरएलएम सहित विभिन्न समूहों के माध्यम से पीरूल एकत्र किया जाए और अधिक पीरूल वाले क्षेत्रों में कॉम्पेक्टर लगाए जाएं जिनका संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कराया जाय।
उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि आग की सूचना और राहत व बचाव की कार्यवाही में तेजी लाने के लिए क्रू स्टेशन स्थापित करते हुए फायर वाचर एवं प्रहरी तैनात किए जाएं। शीघ्र ही सभी फायर वाचरों को आग बुझाने से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए और उनके बीमा कवरेज की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आग लगने की घटना पर सुरक्षात्मक दृष्टि से संबंधित क्षेत्र के चिकित्सालयों को भी अलर्ट मोड में रखा जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा उपचार मुहैया कराया जा सके।
जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जंगलों से फायर लाइन निर्माण का कार्य शीघ्र करा लिया जाय, पीरूल संग्रहण का कार्य बढ़ाया जाय गत वर्ष से अधिक मात्रा में पीरूल एकत्रित किया जाय। कंट्रोल बर्निंग का कार्य समय पर पूर्ण किया जाय।
जिलाधिकारी निर्देश दिए कि वनाग्नि रोकथाम हेतु किए जा रहे कार्यों की प्रभावी निगरानी की जाए और गतिविधियों की सूचना व्हाट्सअप ग्रुप पर अपडेट की जाएं। साथ ही सूचना तंत्र को मजबूत रखा जाय।जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत के सभी प्रतिनिधिगणों को अपील जारी करते हुए उनका भी सहयोग लिया जाय। उन्होंने कहा कि वनाग्नि नियंत्रण हेतु माइक्रो लेवल पर प्लानिंग की जाए। सभी कंट्रोल रूम को अभी से एक्टिवेट रखा जाए।
उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि वनाग्नि रोकथाम में जनता की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। इसलिए व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें ग्रामीणों, छात्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों,वनाग्नि समितियों,समूहों, मंगल दलों ग्रामीणों को जोड़ते हुए बताया जाए कि एक छोटी सी लापरवाही पूरे जंगल को राख बना सकती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल आग को बुझाना ही नहीं, बल्कि आग लगने की सोच और लापरवाही को खत्म करना है। वन सुरक्षित होंगे तो जल, जीवन और भविष्य सुरक्षित होगा।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल आकाश गंगवार ने बताया गया कि जनपद में वनाग्नि रोकथाम के लिए 239 क्रू स्टेशन स्थापित किए गए हैं तथा प्रत्येक क्रू स्टेशन पर 4-4 फायर वाचरों की तैनाती की जाएगी।सभी को प्रशिक्षण दिया जा रहा है साथ ही इनका बीमा भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीरूल संग्रहण का कार्य गतिमान है। इस वर्ष 9000 कुंतल पीरूल एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही फायर लाइन निर्माण का भी कार्य किया जा रहा है आम लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे, प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन कुमार, यू सी तिवारी, पीसी आर्य, आकाश गंगवार, जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी, सहायक परियोजना निदेशक चंद्रा फर्त्याल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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