नैनीताल:::- चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 30 मार्च को है। इसी दिन से नववर्ष की शुरुआत होगी। इस बार विक्रम संवत 2082 वर्ष आरंभ होगा।
शालिवाहन शक जिसे शक संवत भी कहते हैं, पञ्चाङ्ग, भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और कम्बोडियाई बौद्ध पञ्चाङ्ग के रूप मे प्रयोग किया जाता हैं। माना जाता है कि इसकी प्रवर्तन (आरम्भ) वर्ष 78 ई. में वसन्त विषुव के आसपास हुई थी।2025 में, हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2082 होगा, जो आज मार्च से शुरू होगा, और शक संवत 1947वां वर्ष आरंभ होगा।
मान्यताओं के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। ऐसे में भारतीय परंपरा में इस तिथि से ही नए साल की शुरुआत की जाती है और इस तिथि को अत्यंत शुभ भी माना जाता है। इसे विक्रम संवत या नव संवत्सर भी कहा जाता है।
नववर्ष विक्रम नव संवत्सर की शुरुआत राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने की थी। यह संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे चलता है इसे गणितीय दृष्टि से सबसे सटीक काल गणना माना जाता है ,ज्योतिषी भी इसे ही मानते हैं। इस संवत में कुल 354 दिन होते हैं, और हर तीन साल में एक अतिरिक्त माह (अधिक मास) जोड़ा जाता है, ताकि समय का संतुलन बना रहे। इसे भारत के अलग-अलग राज्यों में गुड़ी पाड़वा, उगादि , चेती चंद जैसे नामों से जाना जाता है।
इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि शुरू होती है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। वहीं, राम नवमी भी इसी महीने में आती है। नव संवत्सर का नाम कालयुक्त सिद्धार्थ है तथा वाहन घोड़ा है ।
साल 2025 में नववर्ष का राजा सूर्य हैं क्योंकि जिस दिन से नववर्ष शुरू होता है, उस दिन के स्वामी को राजा माना जाता है। साल 2025 में नव संवत्सर नववर्ष 30 मार्च को रविवार के दिन से शुरू हुआ था।
सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, मान-सम्मान, त्वचा, प्रतिष्ठा, ऊर्जा, नेतृत्व क्षमता और पिता आदि का कारक माना जाता है ।
