नैनीताल:::- कुमाऊं विश्वविद्यालय डीएसबी परिसर में सोमवार को स्वस्थ मानसिक स्वास्थ्य एवं मेंटल वेल-बीइंग समिति के तत्वावधान में विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग सत्र के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना रहा।
नोडल अधिकारी प्रो. एल.एस. लोधियाल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रम में उत्तराखंड सरकार के निर्देशानुसार कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा इस समिति का गठन किया गया है, शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा सके।
कार्यवाहक डीएसडब्ल्यू एवं विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने कहा कि मस्तिष्क का स्वस्थ और सकारात्मक रहना अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक कार्य को आनंद के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमें ज्ञान देती हैं, जबकि सामाजिक अनुभव हमें जीवन की वास्तविक समझ प्रदान करते हैं।
डीएसबी परिसर की निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा ने कहा कि शरीर का स्वस्थ रहना आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ शरीर से ही स्वस्थ मस्तिष्क विकसित होता है और इससे व्यक्तित्व का समग्र विकास संभव होता है।
बी.डी. पांडे चिकित्सालय की डॉ. गरिमा कांडपाल ने कहा कि कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए तथा ऊर्जा का सकारात्मक आदान-प्रदान जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. मंजू तिवारी ने मस्तिष्क की कोशिकाओं की वृद्धि पर ध्यान देने तथा नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करने पर बल दिया।
डॉ. सुरेश पांडे ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की जानकारी देते हुए समिति के गठन एवं उसके कार्यक्षेत्र पर प्रकाश डाला। डॉ. संतोष कुमार ने विद्यार्थियों को खेलों के लिए समय निकालने और योग के माध्यम से तनाव कम करने की सलाह दी। डॉ. सरोज शर्मा ने कहा कि अच्छी पुस्तकें ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक समझ भी प्रदान करती हैं और हर कार्य के लिए मोबाइल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
सहायक कुलसचिव ने शासन स्तर पर होने वाली बैठकों का उल्लेख करते हुए प्रस्तावों पर चर्चा की। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने भी अपने विचार साझा किए।

