देहरादून ::::- उच्च शिक्षा नितान्त अस्थायी प्राध्यापक राजकीय महाविद्यालय कार्यरत अस्थायी प्राध्यापकों ने गुरुवार कों उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत कों ज्ञापन दिया। पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि नितान्त अस्थायी प्राध्यापक पदों को रिक्त न मानते हुए भरा माना जाये और विभिन्न विषयों में आयोग द्वारा चयनित नियमित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति तथा स्थायी प्राध्यापकों के स्थानांतरण के फलस्वरूप प्रभावित हुए राजकीय महाविद्यालयों में नितान्त अस्थायी प्राध्यापकों के समायोजन किया जाएं।
उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड राजकीय महाविद्यालयों में नितान्त अस्थायी व्यवस्था के अन्तर्गत शिक्षण कार्य के लिए यूजीसी के नियमानुसार नेट,जेआरएफ,पी-एचडी की निर्धारित अर्हता के अनुसार नितान्त अस्थायी प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई थी।
उत्तराखंड के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के स्वीकृत/रिक्त पदों के सापेक्ष नितान्त अस्थायी व्यवस्था के अन्तर्गत यूजीसी द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले उत्तराखंड के स्थानीय युवा विगत 9-10 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे थे, जिनमें से कई नितान्त अस्थायी शिक्षक उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की आयु सीमा से अधिवयस्क भी हो गये हैं और साथ ही समान कार्य एवं दायित्यों के निर्वहन के बाद भी नितान्त अस्थायी प्राध्यापक न्यूनतम मानदेय ₹35000/- प्रति माह एवं विषम सेवा शर्तों के साथ कार्य कर रहे थे जिसके कारण उत्तराखंड के दुर्गम महाविद्यालयों में पूर्ण मानयोग से अपनी सेवा देने के बाद भी इन नितान्त अस्थायी प्राध्यापकों को अत्यंत विषम आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था।


कहा कि नितान्त अस्थायी प्राध्यापक के सेवा इतिहास एवं समर्पण को दृष्टिगत रखते हुए हमारे द्वारा कार्यरत पदों को रिक्त न मानते हुए भरा माना जाये अथवा लोक सेवा आयोग में आगामी चयन प्रक्रिया में अस्थायी शिक्षकों के पदों को प्रेषित न किए जाएं।
नितान्त अस्थायी प्राध्यापकों को आयोग चयन के उपरांत प्रभावित होने से बचाने के लिए इनके पदों को अधियाचित न किया जाना अथवा राजकीय महाविद्यालयों में नए पद सृजन के लिए प्रसारित प्रस्ताव को अतिशीघ्र स्वीकृति, जिससे आयोग चयन के उपरांत प्रभावित होने वाले अस्थायी प्राध्यापकों को समायोजित किया जा सके।


इस दौरान डॉ. अनुज, डॉ. आशीष, डॉ. सुबोध, चिंतामणि, डॉ. सुरजीत, डॉ. तारा, डॉ. अजय, डॉ. मनोज, डॉ. ज्योति, डॉ. वंदना, डॉ. गरिमा, डॉ. नम्रता, डॉ. प्रियंका, डॉ. पूजा, डॉ. मोनिका, डॉ. राकेश, डॉ. दीपक, डॉ. शीशपाल, डॉ. सरण, डॉ. ममता, डॉ. स्वाति, डॉ. भूपेंद्र एवं अन्य प्राध्यापक उपस्थित रहें।