नैनीताल:::-  न्यूनतम वेतन, पेंशन, नियमितीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को तल्लीताल डांठ पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान आशाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। आशाओं ने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को तेज किया जाएगा।
उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन, ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के आह्वान पर एक सितंबर से प्रदेशभर में प्रत्येक मंगलवार को धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके तहत आशा कार्यकर्ताओं ने सीएससी सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और राजकीय चिकित्सालयों में प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठाई।
प्रदर्शन के दौरान आशाओं ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में दिन-रात मातृ-शिशु सुरक्षा से लेकर विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि काम लगातार बढ़ाया जा रहा है, जबकि विभिन्न अभियानों में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में भी कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि विधायकों के वेतन-भत्तों में लगातार वृद्धि की जा रही है, लेकिन आशा कार्यकर्ताओं को उनके श्रम के अनुरूप भुगतान नहीं मिल रहा है।
यूनियन ने मुख्यमंत्री को वर्ष 2021 में खटीमा स्थित कैंप कार्यालय में हुई वार्ता की याद दिलाते हुए कहा कि 31 अगस्त 2021 को आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री ने आशाओं को मासिक मानदेय देने और डीजी हेल्थ के प्रस्ताव के अनुसार 11,500 रुपये प्रतिमाह देने का आश्वासन दिया था। पांच साल बीतने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ है।
आशाओं ने 11,500 रुपये मासिक मानदेय देने के वादे को पूरा करने, न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा देने, सेवानिवृत्ति पर दस लाख रुपये एकमुश्त धनराशि और आजीवन पेंशन देने की मांग की। इसके अलावा विभिन्न मदों में मिलने वाली राशि का हर महीने भुगतान, ट्रेनिंग और पल्स पोलियो अभियान के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन देने, अस्पतालों में सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पद भरने और सभी सरकारी अस्पतालों में आशा घर बनाने की मांग उठाई।
उन्होंने एनएचएम का बजट बढ़ाने, इसमें एनजीओ की भूमिका समाप्त कर कार्य स्वास्थ्य विभाग से कराने और मनमाने तरीके से आशाओं की छंटनी बंद करने की भी मांग की।
प्रदर्शन के दौरान आशाओं ने ‘हमारी मांगें पूरी करो’ और ‘एक कचौड़ी दो, समोसा, इस सरकार का क्या भरोसा’ जैसे नारे लगाकर विरोध जताया। यूनियन ने चेतावनी दी कि विधानसभा चुनाव से पूर्व मांगों का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस दौरान अध्यक्ष कमला कुंजवाल, चंद्रा सती, प्रभा बिष्ट, सुमन बिष्ट, सरिता रावत, राधा देवी, मंजू बोहरा, प्रेमा अधिकारी, बीना उप्रेती, पुष्पा जोशी, बसंती रौतेला , कल्पना, गीता नैनवाल, हेमा आर्या, भगवती भंडारी, पुष्पा देवी आदि मौजूद रहीं।

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