देहरादून:::- उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत लगभग 82 प्रभावित नितांत अस्थायी प्राध्यापकों के समायोजन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उच्च शिक्षा अस्थायी शिक्षक संघ ने प्रभावित प्राध्यापकों के भविष्य और आजीविका से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए शासन से नियमानुसार सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। इस संबंध में संघ के सचिव डॉ. आशीष उपाध्याय ने भाजपा की प्रदेश महामंत्री एवं भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज को ज्ञापन सौंपकर प्रकरण में हस्तक्षेप करने और समाधान की दिशा में पहल करने का अनुरोध किया।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2017, 2018, 2020 एवं 2022 में राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षण-अधिगम तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्तियां की गई थीं। इन प्राध्यापकों ने लंबे समय तक अपनी सेवाएं देकर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में योगदान दिया।
लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियमित नियुक्तियां होने तथा एसएसजे विश्वविद्यालय के परिसर से संबंधित प्राध्यापकों के राजकीय महाविद्यालयों में वापस आने के बाद लगभग 82 नितांत अस्थायी प्राध्यापक प्रभावित हुए हैं। इससे उनके सामने रोजगार और आजीविका से जुड़ी चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं।
डॉ. आशीष उपाध्याय ने ज्ञापन के माध्यम से अनुरोध किया कि प्रभावित प्राध्यापकों की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और विभाग में उपलब्ध रिक्तियों को ध्यान में रखते हुए अन्य विषयों के रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजन की संभावनाओं पर विचार किया जाए। उन्होंने शासन स्तर पर नियमानुसार आवश्यक आदेश जारी करने तथा प्रचलित दिशा-निर्देशों के अनुरूप अन्य व्यवहारिक विकल्प तलाशने की भी अपील की।
उन्होंने प्राध्यापकों की लंबे समय से दी जा रही सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके रोजगार और आजीविका से जुड़े पहलुओं पर मानवीय दृष्टिकोण से विचार किया जाना चाहिए। उच्च शिक्षा व्यवस्था में उनके योगदान को देखते हुए ऐसा समाधान तलाशना आवश्यक है, जिससे प्रभावित प्राध्यापकों के भविष्य के प्रति उत्पन्न अनिश्चितता कम हो सके।
उच्च शिक्षा अस्थायी शिक्षक संघ को उम्मीद है कि इस विषय को शासन स्तर पर गंभीरता से उठाया जाएगा और संबंधित नियमों एवं उपलब्ध विकल्पों के अनुरूप समाधान की दिशा में पहल होगी। संघ ने प्रभावित प्राध्यापकों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रकरण पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की है।

