देहरादून :::- उच्च शिक्षा विभाग के नितांत अस्थायी शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल अपने प्रभावित एवं कार्यरत के साथ उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के यमुना कॉलोनी, देहरादून स्थित आवास पर मिलने पहुँचा। सभी शिक्षक अपने भविष्य, समायोजन, सेवा सुरक्षा तथा सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों को लेकर मंत्री  के सामने गहरी चिंता व्यक्त की।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पिछले लगभग दो वर्षों से प्रभावित अस्थायी शिक्षक न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अनेक बार ज्ञापन, वार्ताओं और आश्वासनों के बावजूद आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं कार्यरत अस्थायी शिक्षक भी अत्यंत अल्प वेतन पर कार्य करने को विवश हैं। जहाँ अब तक वेतन वृद्धि तथा सभी अस्थायी शिक्षकों के लिए स्थायी एवं न्यायसंगत नीति बनाई जानी चाहिए थी, वहाँ आज भी शिक्षक अपने भविष्य और नौकरी की सुरक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।

शिक्षक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि वे अब केवल आश्वासनों पर विश्वास नहीं करेंगे। इस बार सरकार से तथ्यों पर आधारित, समयबद्ध और ठोस निर्णय की अपेक्षा है, क्योंकि यह विषय केवल रोजगार का नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों के सम्मान, प्रतिष्ठा और भविष्य से जुड़ा हुआ है।

मंत्री ने पत्र में निदेशक के लिए पद और अन्य पद के सापेक्ष रिक्तियों का डेटा भेजने के लिए लिखा और दूरभाष से हमारे संबंध में जल्द से जल्द रिपोर्ट भेजने के लिए कहा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। यदि इस बार भी सरकार द्वारा समायोजन, वेतन वृद्धि तथा भविष्य की सुरक्षा के संबंध में कोई ठोस एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो सभी प्रभावित एवं कार्यरत अस्थायी शिक्षक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन की आगामी रणनीति बनाने के लिए बाध्य होंगे।

प्रतिनिधिमंडल ने अंत में कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सभी कार्यरत एवं प्रभावित अस्थायी शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य का संघर्ष है। सभी साथियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की इस लड़ाई को मजबूत बनाने का आह्वान किया गया।
इस दौरान डॉ.रोहित, डॉ.मोहित, डॉ.मनोज, डॉ.शैलेश, डॉ. सरन, डॉ. प्रवेश, डॉ. चिंतामणि, डॉ.राकेश, डॉ. ममता, डॉ. जयहरी, डॉ. रणजीत, डॉ.राकेश, डॉ.ब्रह्मराज, डॉ. बबलू, डॉ. बिपिन, डॉ. प्रियंका, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ.ममता आदि रहें

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