नैनीताल :::- कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.ललित तिवारी ने भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान में वाइल्ड लाइफ़ विक के अंतर्गत नेचर कंजर्वेशन एंड वाइल्ड लाइफ विषय पर व्यख्यान दिया । प्रो.तिवारी ने कहा कि जैव विविधता जिसमें वनस्पति एवं प्राणी आते है उनका पर्यावरण से संबंध ही हमारा भविष्य होता है। डॉ. तिवारी ने कहा कि कन्वेंशन ऑफ बायोलॉजिकल डायवर्सिटी हमे सतत विकास , बराबरी की हिस्सेदारी ,तथा संरक्षण का संदेश देते है । उन्होंने जैव विविधता पर उनके मूल्य ,उनकी संख्या पर भी प्रकाश डाला। डॉ तिवारी ने कहा की हिंदु कुश पार्वती से निकलने वाली 10 बड़ी नदिया 3 अरब लोगी को भजन तथा ऊर्जा देने का काम करती है । बताया की जीव जंतुओं का हमारे जीवन में विशेष महत्व है जो हमें संस्कृति , एथिक्स ,पारिस्थितिक , वैज्ञानिक के साथ रीक्रिएशनल ,आर्थिक तथा पंचरत्न जैसे सृजन में मदद करते है। भगवान शिव नाग के साथ तो दुर्गा शेर ,सरस्वती स्वान ,लक्ष्मी हाथी ,विष्णु भगवान शेष नाग के साथ है । शिवजी का नंदी ,गणेश जी का मूषक ,कृष्ण जी की गाय, वानर सेना , बाग को वीरता , मोर को प्रेरक तथा भारतीय संस्कृति में आर्किटेक्चर में भी जंतु नजर आते है । बाज़ एवं हवाई जहाज की एक सी रचना तथा फूड चैन एवं फूड वेब हमारे आपसी सद्भाव तथा संरचना को दिखाते है । चिड़िया ईवा गिलहरी पौधे को जमीन में लगाने का काम बखूबी करते है ।परागण चिड़ियों तथा इंसेक्ट से ही होता है । चित्रकारी हो या भारतीय पारंपरिक ज्ञान जंतुओं की विदेह भूमिका रहती है । ऋग्वेद सूर्य ,चंद्रमा ,थंडर ,स्नो ,वर्ष ,पौधों ,नदी के संरक्षण की बात कहते है । सूर्य की आराधना को ऊर्जा के रूप में श्रोत्र माना गया है । महाभारत ,रामायण ,मेघदूत प्रकृति का वर्णन भी करते है । सैक्रेड ग्रीव्स , टोटेमजिम , खेजड़ी वृक्ष, हमें बेहतर उदाहरण देते है । 15 बायोस्फीयर रिजर्व ,106, नेशनल पार्क ,573 सेंक्चुरीज ,44 टाइगर रिजर्व ,220 कम्युनिटी रिजर्व एवं 115 कंजर्वेशन रिजर्व हमें सतत विकास एवं संरक्षण का संदेश देते है ।इसके लिए कड़े कानून भी बनाए है। हम संरक्षण के लिए स्व स्थान तथा बही स्थान की सिद्धांत के अनुसार कर सकते है। इस दौरान कार्यशाला में डिप्टी डायरेक्टर स्वाति ,ममता चंद , रेंज ऑफिसर , मनोज साह ,डॉ रजनी , डॉ हिमांशु ,डॉ भारद्वाज ,पर्यावरण विद जगदीश नेगी समेत अन्य लोग मौजूद रहें।

